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बर्फ के पहाड़ से लेकर सड़कों तक, ट्रंप की 'दादागीरी' के खिलाफ दावोस में प्रदर्शन - NDTV.in

By Aravind Sharma Published January 21, 2026
**बर्फ के पहाड़ से लेकर सड़कों तक, ट्रंप की 'दादागीरी' के खिलाफ दावोस में प्रदर्शन**

स्विस आल्प्स की बर्फीली वादियों में स्थित दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। दुनिया भर के अरबपतियों, राष्ट्राध्यक्षों और व्यापारिक दिग्गजों के इस जमावड़े के बीच ट्रंप की मौजूदगी ने एक वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है। दावोस की कड़कड़ाती ठंड और भारी बर्फबारी के बावजूद, हजारों प्रदर्शनकारी 'एंटी-ट्रंप' नारों के साथ सड़कों पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ट्रंप का वैश्विक नेतृत्व और उनका रवैया अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बजाय 'दादागीरी' पर आधारित है।

प्रदर्शनों का यह सिलसिला केवल शहर की मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदर्शनकारी अपने बैनर और पोस्टर लेकर बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ों की चोटियों तक जा पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से पर्यावरण कार्यकर्ता, मानवाधिकार संगठन और वैश्वीकरण विरोधी समूह शामिल हैं। उनका सबसे बड़ा विरोध जलवायु परिवर्तन पर ट्रंप के उदासीन रुख और पेरिस समझौते से हटने के फैसले को लेकर है। पहाड़ों की सफेद चादर पर रंगीन पोस्टरों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि दुनिया की जनता अब 'अमेरिका फर्स्ट' की उस नीति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जो पर्यावरण और वैश्विक शांति को हाशिए पर धकेलती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की कार्यशैली ने दावोस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक विभाजन पैदा कर दिया है। एक ओर जहां वे अपनी आर्थिक नीतियों और व्यापारिक समझौतों को दुनिया के सामने अपनी जीत के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे छोटे देशों और वैश्विक संस्थानों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप की 'दादागीरी' ने मुक्त व्यापार के नाम पर केवल शक्तिशाली देशों के हितों को साधा है। 'गो अवे ट्रंप' (Go Away Trump) के नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे उनकी दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट हैं।

अंततः, दावोस में हो रहे ये प्रदर्शन इस बात का प्रतीक हैं कि वैश्विक मंच पर अब आर्थिक चर्चाओं के साथ-साथ आम जनता और पर्यावरण की सुरक्षा की मांग भी मजबूती से उठ रही है। वीआईपी सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब उन वैश्विक नेताओं के लिए एक चेतावनी है, जो विकास के नाम पर मानवीय मूल्यों की अनदेखी कर रहे हैं। बर्फ की पहाड़ियों से लेकर दावोस के चौराहों तक गूंज रही यह विरोध की आवाज दुनिया को यह संदेश दे रही है कि सत्ता की ताकत से हर आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News

Aravind Sharma

Senior Political Correspondent with 15 years of experience.

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