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दही-चूड़ा भोज में सियासी संदेश: चिराग से चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश, NDA में बढ़ी गर्माहट पर विपक्ष ने ली चुटकी - bihar politics nitish kumars makar sankranti dahichura diplomacy chirag paswan - Jagran
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**दही-चूड़ा भोज में सियासी संदेश: चिराग से चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश, NDA में बढ़ी गर्माहट पर विपक्ष ने ली चुटकी**
बिहार की राजनीति में त्योहारों का अपना एक अलग महत्व है, और मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले पारंपरिक 'दही-चूड़ा' भोज ने एक बार फिर राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दिग्गजों के आवास पर पहुंचकर न केवल शिष्टाचार निभाया, बल्कि भविष्य के गठबंधन के समीकरणों का भी स्पष्ट संकेत दिया। पटना की कड़ाके की ठंड के बीच राजनीति की गर्माहट तब महसूस की गई जब नीतीश कुमार पारंपरिक भोज में शामिल होने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे पहुंचे। यह आयोजन महज एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि बिहार की 'दही-चूड़ा डिप्लोमेसी' का अहम हिस्सा था, जहां हर मुलाकात के पीछे एक गहरा राजनीतिक निहितार्थ छिपा नजर आया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चिराग पासवान के पास जाने और फिर आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद से मिलने की रही। एक समय में चिराग पासवान और नीतीश कुमार के बीच की कड़वाहट जगजाहिर थी, लेकिन इस भोज के बहाने दोनों नेताओं की नजदीकियों ने एनडीए (NDA) के भीतर नए तालमेल की ओर इशारा किया है। चिराग के साथ नीतीश की सहजता और फिर चेतन आनंद के पास उनकी पहुंच ने यह साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री राज्य के महत्वपूर्ण जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कवायद में जुटे हैं। इन मुलाकातों ने बिहार की राजनीति के पुराने घावों पर मरहम लगाने और नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखने का काम किया है।
एनडीए खेमे में इस बढ़ती सक्रियता और सौहार्दपूर्ण माहौल ने गठबंधन के भीतर एक सकारात्मक संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह रुख भाजपा और उसके सहयोगियों के साथ उनके रिश्तों की मजबूती को और अधिक पुख्ता करता है। दही-चूड़ा के इस भोज में जिस तरह से विभिन्न घटक दलों के नेता एक साथ बैठे और हंसी-मजाक के बीच गंभीर चर्चाएं कीं, उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आगामी चुनौतियों और चुनावों के लिए एनडीए पूरी तरह एकजुट है। चिराग से लेकर चेतन तक, नीतीश कुमार की यह पहुंच न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने की कोशिश है, बल्कि यह विपक्षी खेमे को अपनी सामूहिक शक्ति दिखाने का भी एक सशक्त जरिया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की इस 'दही-चूड़ा डिप्लोमेसी' पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे 'बदलाव की आहट' की जगह 'राजनीतिक अवसरवाद' करार दिया है। महागठबंधन के नेताओं ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह मेल-मिलाप केवल सत्ता के संतुलन को बनाए रखने के लिए है और जनता इस दिखावे को बखूबी समझ रही है। विपक्ष का तर्क है कि जो नेता एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं, वे आज केवल चुनावी लाभ के लिए एक मेज पर दही-चूड़ा खा रहे हैं। हालांकि, इन आलोचनाओं के बावजूद, पटना की सड़कों पर मकर संक्रांति के इस भोज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में समीकरण और भी दिलचस्प होने वाले हैं, जिसकी पटकथा इन्हीं मुलाकातों के जरिए लिखी जा रही है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
बिहार की राजनीति में त्योहारों का अपना एक अलग महत्व है, और मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले पारंपरिक 'दही-चूड़ा' भोज ने एक बार फिर राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दिग्गजों के आवास पर पहुंचकर न केवल शिष्टाचार निभाया, बल्कि भविष्य के गठबंधन के समीकरणों का भी स्पष्ट संकेत दिया। पटना की कड़ाके की ठंड के बीच राजनीति की गर्माहट तब महसूस की गई जब नीतीश कुमार पारंपरिक भोज में शामिल होने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे पहुंचे। यह आयोजन महज एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि बिहार की 'दही-चूड़ा डिप्लोमेसी' का अहम हिस्सा था, जहां हर मुलाकात के पीछे एक गहरा राजनीतिक निहितार्थ छिपा नजर आया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चिराग पासवान के पास जाने और फिर आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद से मिलने की रही। एक समय में चिराग पासवान और नीतीश कुमार के बीच की कड़वाहट जगजाहिर थी, लेकिन इस भोज के बहाने दोनों नेताओं की नजदीकियों ने एनडीए (NDA) के भीतर नए तालमेल की ओर इशारा किया है। चिराग के साथ नीतीश की सहजता और फिर चेतन आनंद के पास उनकी पहुंच ने यह साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री राज्य के महत्वपूर्ण जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कवायद में जुटे हैं। इन मुलाकातों ने बिहार की राजनीति के पुराने घावों पर मरहम लगाने और नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखने का काम किया है।
एनडीए खेमे में इस बढ़ती सक्रियता और सौहार्दपूर्ण माहौल ने गठबंधन के भीतर एक सकारात्मक संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह रुख भाजपा और उसके सहयोगियों के साथ उनके रिश्तों की मजबूती को और अधिक पुख्ता करता है। दही-चूड़ा के इस भोज में जिस तरह से विभिन्न घटक दलों के नेता एक साथ बैठे और हंसी-मजाक के बीच गंभीर चर्चाएं कीं, उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आगामी चुनौतियों और चुनावों के लिए एनडीए पूरी तरह एकजुट है। चिराग से लेकर चेतन तक, नीतीश कुमार की यह पहुंच न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने की कोशिश है, बल्कि यह विपक्षी खेमे को अपनी सामूहिक शक्ति दिखाने का भी एक सशक्त जरिया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार की इस 'दही-चूड़ा डिप्लोमेसी' पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे 'बदलाव की आहट' की जगह 'राजनीतिक अवसरवाद' करार दिया है। महागठबंधन के नेताओं ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह मेल-मिलाप केवल सत्ता के संतुलन को बनाए रखने के लिए है और जनता इस दिखावे को बखूबी समझ रही है। विपक्ष का तर्क है कि जो नेता एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं, वे आज केवल चुनावी लाभ के लिए एक मेज पर दही-चूड़ा खा रहे हैं। हालांकि, इन आलोचनाओं के बावजूद, पटना की सड़कों पर मकर संक्रांति के इस भोज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में समीकरण और भी दिलचस्प होने वाले हैं, जिसकी पटकथा इन्हीं मुलाकातों के जरिए लिखी जा रही है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.