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यूपी के ठाकुर बाहुबली नेताओं में होड़- कौन सबसे बड़ा?: बृजभूषण सिंह ने कहा- राजनाथ हम सब में बड़े; जानिए सियास... - Dainik Bhaskar
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**यूपी के ठाकुर बाहुबली नेताओं में होड़- कौन सबसे बड़ा?: बृजभूषण सिंह ने कहा- राजनाथ हम सब में बड़े**
**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश की सियासत में 'ठाकुर' राजनीति और 'बाहुबल' का तालमेल हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह सवाल तैरता रहता है कि आखिर क्षत्रिय समाज का सबसे कद्दावर चेहरा कौन है? हाल के दिनों में इस होड़ ने तब नया मोड़ ले लिया जब कई दिग्गज ठाकुर नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग और खुद को समाज का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिशें तेज हो गईं। बाहुबली छवि वाले नेताओं से लेकर सत्ता के शिखर पर बैठे चेहरों तक, हर कोई अपनी-अपनी तरह से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया है। वर्चस्व की इस कथित लड़ाई पर विराम लगाते हुए बृजभूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि जहां तक कद और अनुभव की बात है, तो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हम सभी में सबसे बड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के सबसे सम्मानित क्षत्रिय नेताओं में शुमार हैं और उनके नेतृत्व को चुनौती देने का सवाल ही नहीं उठता। बृजभूषण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई अन्य ठाकुर नेताओं के बीच 'नंबर वन' बनने की अघोषित प्रतिस्पर्धा देखी जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'बाहुबली' का ठप्पा लगने के बाद भी अपनी सामाजिक साख बचाए रखना इन नेताओं के लिए बड़ी चुनौती होती है। राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह), धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह जैसे नाम अपनी-अपनी बेल्ट में खासा प्रभाव रखते हैं। लेकिन जब बात राष्ट्रीय स्तर की राजनीति और सांगठनिक मर्यादा की आती है, तो इन नेताओं को भी किसी न किसी बड़े चेहरे की शरण लेनी पड़ती है। बृजभूषण सिंह का राजनाथ सिंह को 'सबसे बड़ा' बताना इसी राजनीतिक शिष्टाचार और आगामी चुनावों के मद्देनजर अपनी स्थिति सुरक्षित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश में ठाकुर नेताओं के बीच की यह 'होड़' केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद भी छिपी है। विपक्षी दल अक्सर सत्ताधारी दल के भीतर 'ठाकुरवाद' के आरोप लगाते रहे हैं, ऐसे में पार्टी के भीतर सीनियर नेताओं के प्रति सम्मान दिखाकर बाहुबली नेता जनता और हाईकमान को अनुशासन का संदेश देना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि बृजभूषण सिंह के इस बयान के बाद राज्य के अन्य क्षत्रिय क्षत्रपों की क्या प्रतिक्रिया होती है और आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का यह 'शक्ति संघर्ष' क्या रुख अख्तियार करता है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश की सियासत में 'ठाकुर' राजनीति और 'बाहुबल' का तालमेल हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह सवाल तैरता रहता है कि आखिर क्षत्रिय समाज का सबसे कद्दावर चेहरा कौन है? हाल के दिनों में इस होड़ ने तब नया मोड़ ले लिया जब कई दिग्गज ठाकुर नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग और खुद को समाज का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिशें तेज हो गईं। बाहुबली छवि वाले नेताओं से लेकर सत्ता के शिखर पर बैठे चेहरों तक, हर कोई अपनी-अपनी तरह से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया है। वर्चस्व की इस कथित लड़ाई पर विराम लगाते हुए बृजभूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि जहां तक कद और अनुभव की बात है, तो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हम सभी में सबसे बड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के सबसे सम्मानित क्षत्रिय नेताओं में शुमार हैं और उनके नेतृत्व को चुनौती देने का सवाल ही नहीं उठता। बृजभूषण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई अन्य ठाकुर नेताओं के बीच 'नंबर वन' बनने की अघोषित प्रतिस्पर्धा देखी जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'बाहुबली' का ठप्पा लगने के बाद भी अपनी सामाजिक साख बचाए रखना इन नेताओं के लिए बड़ी चुनौती होती है। राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह), धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह जैसे नाम अपनी-अपनी बेल्ट में खासा प्रभाव रखते हैं। लेकिन जब बात राष्ट्रीय स्तर की राजनीति और सांगठनिक मर्यादा की आती है, तो इन नेताओं को भी किसी न किसी बड़े चेहरे की शरण लेनी पड़ती है। बृजभूषण सिंह का राजनाथ सिंह को 'सबसे बड़ा' बताना इसी राजनीतिक शिष्टाचार और आगामी चुनावों के मद्देनजर अपनी स्थिति सुरक्षित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश में ठाकुर नेताओं के बीच की यह 'होड़' केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद भी छिपी है। विपक्षी दल अक्सर सत्ताधारी दल के भीतर 'ठाकुरवाद' के आरोप लगाते रहे हैं, ऐसे में पार्टी के भीतर सीनियर नेताओं के प्रति सम्मान दिखाकर बाहुबली नेता जनता और हाईकमान को अनुशासन का संदेश देना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि बृजभूषण सिंह के इस बयान के बाद राज्य के अन्य क्षत्रिय क्षत्रपों की क्या प्रतिक्रिया होती है और आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का यह 'शक्ति संघर्ष' क्या रुख अख्तियार करता है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.