भारत
कर्नाटक में राहुल गांधी के स्वागत पर सियासी घमासान, जर्मन चांसलर की अनदेखी का आरोप - AajTak
By Aravind Sharma
•
Published January 20, 2026
**कर्नाटक में राहुल गांधी के स्वागत पर सियासी घमासान, जर्मन चांसलर की अनदेखी का आरोप**
**बेंगलुरु:** कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर प्रोटोकॉल और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर तलवारें खिंच गई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के हालिया कर्नाटक दौरे के दौरान उनके भव्य स्वागत को लेकर राज्य की भाजपा इकाई ने सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला बोला है। विवाद का मुख्य केंद्र वह आरोप है जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने अपने पार्टी नेता के स्वागत में तो पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन उसी दौरान आए अंतरराष्ट्रीय महत्व के अतिथि, जर्मन चांसलर की गरिमा और प्रोटोकॉल की कथित तौर पर अनदेखी की गई। इस मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि कर्नाटक में 'राजशाही' का माहौल है। विपक्षी दल का आरोप है कि राज्य प्रशासन ने राहुल गांधी के लिए रेड कार्पेट बिछाने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने में जितनी सक्रियता दिखाई, वैसी तत्परता जर्मन चांसलर जैसे उच्च पदस्थ विदेशी मेहमान के स्वागत में नहीं दिखी। भाजपा ने इसे 'प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन' और राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाने वाला कदम बताया है। पार्टी का तर्क है कि एक राज्य सरकार के लिए पार्टी के नेता से ऊपर देश के कूटनीतिक संबंध होने चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा की 'हताशा' करार दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि जर्मन चांसलर का स्वागत निर्धारित अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत पूरी गरिमा के साथ किया गया था। कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी का स्वागत पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह था और इसका सरकारी प्रोटोकॉल से कोई टकराव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और आतिथ्य में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है और भाजपा केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक में इस तरह का सियासी घमासान आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि राज्य की राजनीति में अब अंतरराष्ट्रीय दौरों को भी स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखा जाने लगा है। राहुल गांधी के स्वागत बनाम विदेशी चांसलर की अनदेखी का यह मुद्दा न केवल प्रोटोकॉल की बहस तक सीमित है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्नाटक की ब्रांडिंग से भी जुड़ गया है। फिलहाल, 'सत्य संवाद' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या जांच के आदेश देती है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
**बेंगलुरु:** कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर प्रोटोकॉल और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर तलवारें खिंच गई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के हालिया कर्नाटक दौरे के दौरान उनके भव्य स्वागत को लेकर राज्य की भाजपा इकाई ने सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला बोला है। विवाद का मुख्य केंद्र वह आरोप है जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने अपने पार्टी नेता के स्वागत में तो पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन उसी दौरान आए अंतरराष्ट्रीय महत्व के अतिथि, जर्मन चांसलर की गरिमा और प्रोटोकॉल की कथित तौर पर अनदेखी की गई। इस मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि कर्नाटक में 'राजशाही' का माहौल है। विपक्षी दल का आरोप है कि राज्य प्रशासन ने राहुल गांधी के लिए रेड कार्पेट बिछाने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने में जितनी सक्रियता दिखाई, वैसी तत्परता जर्मन चांसलर जैसे उच्च पदस्थ विदेशी मेहमान के स्वागत में नहीं दिखी। भाजपा ने इसे 'प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन' और राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाने वाला कदम बताया है। पार्टी का तर्क है कि एक राज्य सरकार के लिए पार्टी के नेता से ऊपर देश के कूटनीतिक संबंध होने चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा की 'हताशा' करार दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि जर्मन चांसलर का स्वागत निर्धारित अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत पूरी गरिमा के साथ किया गया था। कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी का स्वागत पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह था और इसका सरकारी प्रोटोकॉल से कोई टकराव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और आतिथ्य में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है और भाजपा केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक में इस तरह का सियासी घमासान आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि राज्य की राजनीति में अब अंतरराष्ट्रीय दौरों को भी स्थानीय राजनीति के चश्मे से देखा जाने लगा है। राहुल गांधी के स्वागत बनाम विदेशी चांसलर की अनदेखी का यह मुद्दा न केवल प्रोटोकॉल की बहस तक सीमित है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्नाटक की ब्रांडिंग से भी जुड़ गया है। फिलहाल, 'सत्य संवाद' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या जांच के आदेश देती है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.