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बवाल मचा तो MLA बरैया खुद के बयान से पलटे: कहा- मैंने बिहार के प्रोफेसर की किताब में पढ़ा, मंत्री बागरी बोली... - Dainik Bhaskar
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**बवाल मचा तो MLA बरैया खुद के बयान से पलटे: कहा- मैंने बिहार के प्रोफेसर की किताब में पढ़ा, मंत्री बागरी बोली...**
**सत्य संवाद, विशेष रिपोर्ट:**
मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानों का दौर अक्सर गर्माया रहता है, लेकिन दतिया के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का हालिया बयान एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। अपने बेबाक और कई बार विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर बरैया ने एक बार फिर ऐसी टिप्पणी की जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। हालांकि, जब इस मामले ने तूल पकड़ा और चौतरफा विरोध शुरू हुआ, तो विधायक बरैया अपने कदम पीछे खींचते नजर आए। उन्होंने सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए तर्क उनके स्वयं के नहीं थे, बल्कि उन्होंने इसे एक लिखित संदर्भ के रूप में उद्धृत किया था।
विधायक बरैया ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह बिहार के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर द्वारा लिखित पुस्तक में दर्ज तथ्यों पर आधारित था। उन्होंने तर्क दिया कि वे केवल उस ऐतिहासिक या अकादमिक शोध को जनता के बीच रख रहे थे, जिसका जिक्र उस किताब में किया गया है। बरैया का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हालांकि, उनके इस 'यू-टर्न' को विपक्ष ने उनकी राजनीतिक कमजोरी करार दिया है और आरोप लगाया है कि विवाद बढ़ता देख वे अब किताबों का सहारा ले रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी ने तीखा पलटवार किया है। मंत्री बागरी ने कहा कि कांग्रेस विधायक अक्सर समाज में विद्वेष फैलाने वाले बयान देते हैं और जब जनता का आक्रोश सामने आता है, तो वे पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने बरैया के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी किताब का हवाला देकर आप समाज को अपमानित करने का लाइसेंस नहीं पा लेते। बागरी ने इसे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य समाज को वर्गों में बांटकर राजनीतिक लाभ उठाना है। उन्होंने मांग की कि ऐसे बयानों पर सार्वजनिक माफी मांगी जानी चाहिए।
फिलहाल, फूल सिंह बरैया के इस बयान और उसके बाद आई सफाई ने मध्यप्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नजदीक न होने के बावजूद इस तरह की बयानबाजी ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देती है। बरैया द्वारा बिहार के प्रोफेसर की किताब का जिक्र करना अब शोध का विषय बन गया है कि आखिर वह कौन सी किताब है और उसमें क्या लिखा है। लेकिन इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में जातिगत और वैचारिक बयानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई और गहरी होने वाली है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
**सत्य संवाद, विशेष रिपोर्ट:**
मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानों का दौर अक्सर गर्माया रहता है, लेकिन दतिया के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का हालिया बयान एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। अपने बेबाक और कई बार विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर बरैया ने एक बार फिर ऐसी टिप्पणी की जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। हालांकि, जब इस मामले ने तूल पकड़ा और चौतरफा विरोध शुरू हुआ, तो विधायक बरैया अपने कदम पीछे खींचते नजर आए। उन्होंने सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए तर्क उनके स्वयं के नहीं थे, बल्कि उन्होंने इसे एक लिखित संदर्भ के रूप में उद्धृत किया था।
विधायक बरैया ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह बिहार के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर द्वारा लिखित पुस्तक में दर्ज तथ्यों पर आधारित था। उन्होंने तर्क दिया कि वे केवल उस ऐतिहासिक या अकादमिक शोध को जनता के बीच रख रहे थे, जिसका जिक्र उस किताब में किया गया है। बरैया का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हालांकि, उनके इस 'यू-टर्न' को विपक्ष ने उनकी राजनीतिक कमजोरी करार दिया है और आरोप लगाया है कि विवाद बढ़ता देख वे अब किताबों का सहारा ले रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी ने तीखा पलटवार किया है। मंत्री बागरी ने कहा कि कांग्रेस विधायक अक्सर समाज में विद्वेष फैलाने वाले बयान देते हैं और जब जनता का आक्रोश सामने आता है, तो वे पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने बरैया के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी किताब का हवाला देकर आप समाज को अपमानित करने का लाइसेंस नहीं पा लेते। बागरी ने इसे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य समाज को वर्गों में बांटकर राजनीतिक लाभ उठाना है। उन्होंने मांग की कि ऐसे बयानों पर सार्वजनिक माफी मांगी जानी चाहिए।
फिलहाल, फूल सिंह बरैया के इस बयान और उसके बाद आई सफाई ने मध्यप्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नजदीक न होने के बावजूद इस तरह की बयानबाजी ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देती है। बरैया द्वारा बिहार के प्रोफेसर की किताब का जिक्र करना अब शोध का विषय बन गया है कि आखिर वह कौन सी किताब है और उसमें क्या लिखा है। लेकिन इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में जातिगत और वैचारिक बयानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई और गहरी होने वाली है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.