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हरियाणा में कांग्रेस विधायक ने SDM को थमाया झुनझुना, कहा- तेरे बस का कुछ नहीं, इसे बजाते रहो - Navbharat Times
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**सत्य संवाद विशेष रिपोर्ट**
हरियाणा की राजनीति में अक्सर तीखी बयानबाजी और अनोखे विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आई एक घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। राज्य के एक कांग्रेस विधायक और उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के बीच हुआ विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। मिली जानकारी के अनुसार, विधायक अपने क्षेत्र की जनसमस्याओं और विकास कार्यों की कछुआ चाल से इस कदर नाराज थे कि उन्होंने विरोध जताने का एक बेहद अलग और विवादित तरीका चुना। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें एक 'झुनझुना' भेंट कर दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
घटना के दौरान माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया जब विधायक ने तीखे लहजे में एसडीएम पर तंज कसा। उन्होंने अधिकारी को झुनझुना थमाते हुए सीधे तौर पर कहा, "तेरे बस का कुछ नहीं है, इसे पकड़ो और बजाते रहो।" विधायक का आरोप था कि क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन केवल फाइलों में ही व्यस्त है। विधायक ने दावा किया कि अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं और धरातल पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर हरियाणा में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है। जहां विधायक के समर्थकों ने इसे जनता की आवाज उठाने का एक निडर तरीका बताया है, वहीं प्रशासनिक हलकों में इस व्यवहार की कड़ी निंदा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का आचरण न केवल पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही इस तरह की आक्रामकता राजनीतिक लाभ लेने और खुद को जनता का हितैषी साबित करने की एक रणनीति भी हो सकती है।
अंततः, यह मामला प्रशासन और शासन के बीच के संवादहीनता की गहरी खाई को दर्शाता है। लोकतंत्र में जहां विधायक जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं, वहीं अधिकारियों को नियमों और सीमित संसाधनों के भीतर काम करना होता है। 'झुनझुना' थमाने की यह प्रतीकात्मक घटना व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है या केवल एक राजनीतिक स्टंट, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, इस विवाद ने हरियाणा की सियासत में गर्मी पैदा कर दी है और विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी नजरें जमाए हुए है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
हरियाणा की राजनीति में अक्सर तीखी बयानबाजी और अनोखे विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आई एक घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। राज्य के एक कांग्रेस विधायक और उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के बीच हुआ विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। मिली जानकारी के अनुसार, विधायक अपने क्षेत्र की जनसमस्याओं और विकास कार्यों की कछुआ चाल से इस कदर नाराज थे कि उन्होंने विरोध जताने का एक बेहद अलग और विवादित तरीका चुना। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें एक 'झुनझुना' भेंट कर दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
घटना के दौरान माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया जब विधायक ने तीखे लहजे में एसडीएम पर तंज कसा। उन्होंने अधिकारी को झुनझुना थमाते हुए सीधे तौर पर कहा, "तेरे बस का कुछ नहीं है, इसे पकड़ो और बजाते रहो।" विधायक का आरोप था कि क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन केवल फाइलों में ही व्यस्त है। विधायक ने दावा किया कि अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं और धरातल पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर हरियाणा में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है। जहां विधायक के समर्थकों ने इसे जनता की आवाज उठाने का एक निडर तरीका बताया है, वहीं प्रशासनिक हलकों में इस व्यवहार की कड़ी निंदा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का आचरण न केवल पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही इस तरह की आक्रामकता राजनीतिक लाभ लेने और खुद को जनता का हितैषी साबित करने की एक रणनीति भी हो सकती है।
अंततः, यह मामला प्रशासन और शासन के बीच के संवादहीनता की गहरी खाई को दर्शाता है। लोकतंत्र में जहां विधायक जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं, वहीं अधिकारियों को नियमों और सीमित संसाधनों के भीतर काम करना होता है। 'झुनझुना' थमाने की यह प्रतीकात्मक घटना व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है या केवल एक राजनीतिक स्टंट, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, इस विवाद ने हरियाणा की सियासत में गर्मी पैदा कर दी है और विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी नजरें जमाए हुए है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.