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लालू यादव के रहते तेजस्वी संभालेंगे RJD की राष्ट्रीय कमान, पूरी पार्टी बदलने का प्लान - NDTV.in
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**लालू यादव के रहते तेजस्वी संभालेंगे RJD की राष्ट्रीय कमान, पूरी पार्टी बदलने का प्लान**
बिहार की राजनीति में एक बड़े युगांतरकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव की उपस्थिति और उनके मार्गदर्शन में ही तेजस्वी यादव को पार्टी की राष्ट्रीय कमान पूरी तरह सौंपने की तैयारी कर ली गई है। यह कदम केवल सत्ता के हस्तांतरण का संकेत नहीं है, बल्कि पार्टी की छवि, कार्यशैली और विचारधारा में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। लालू यादव के दशकों पुराने राजनीतिक अनुभव और तेजस्वी के आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय से आरजेडी अब एक नए अवतार में जनता के सामने आने के लिए तैयार दिख रही है।
'पूरी पार्टी बदलने का प्लान' के तहत तेजस्वी यादव आरजेडी को उसकी पारंपरिक 'माय' (मुस्लिम-यादव) समीकरण वाली छवि से बाहर निकालकर 'ए टू जेड' (A to Z) वाली समावेशी पार्टी बनाना चाहते हैं। तेजस्वी का मानना है कि भविष्य की राजनीति के लिए केवल सामाजिक समीकरण ही काफी नहीं हैं, बल्कि विकास, रोजगार और शिक्षा जैसे ठोस मुद्दों पर युवाओं को जोड़ना अनिवार्य है। इसके लिए पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सीधी जवाबदेही तय करना शामिल है। तेजस्वी का विजन पार्टी को एक आधुनिक और पेशेवर राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित करना है।
लालू प्रसाद यादव भले ही स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे हों, लेकिन तेजस्वी के इस 'मिशन ट्रांसफॉर्मेशन' में उनकी छत्रछाया सबसे महत्वपूर्ण है। पार्टी के पुराने दिग्गजों और युवा चेहरों के बीच संतुलन बनाए रखना तेजस्वी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आगामी बैठकों में कई नए और शिक्षित चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे पार्टी के पुराने ढर्रे को बदलकर उसे 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढाला जा सके। तेजस्वी की इस नई टीम का मुख्य लक्ष्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर सवर्णों और दलितों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाना है।
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आरजेडी का यह नया कलेवर बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर सकता है। तेजस्वी यादव का जोर अब उग्र नारेबाजी के बजाय आंकड़ों, नीतिगत बहस और विजन आधारित राजनीति पर है। यदि वे सफलतापूर्वक पार्टी के भीतर इस संगठनात्मक बदलाव को लागू कर पाते हैं, तो यह न केवल आरजेडी के लिए बल्कि पूरे विपक्ष के भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। राजनीति के जानकार इसे लालू युग के गौरवशाली इतिहास को सहेजते हुए 'तेजस्वी युग' के आधिकारिक उदय के रूप में देख रहे हैं, जहाँ पार्टी अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी एक प्रगतिशील और समावेशी संगठन बनने की ओर अग्रसर है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
बिहार की राजनीति में एक बड़े युगांतरकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लालू प्रसाद यादव की उपस्थिति और उनके मार्गदर्शन में ही तेजस्वी यादव को पार्टी की राष्ट्रीय कमान पूरी तरह सौंपने की तैयारी कर ली गई है। यह कदम केवल सत्ता के हस्तांतरण का संकेत नहीं है, बल्कि पार्टी की छवि, कार्यशैली और विचारधारा में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। लालू यादव के दशकों पुराने राजनीतिक अनुभव और तेजस्वी के आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय से आरजेडी अब एक नए अवतार में जनता के सामने आने के लिए तैयार दिख रही है।
'पूरी पार्टी बदलने का प्लान' के तहत तेजस्वी यादव आरजेडी को उसकी पारंपरिक 'माय' (मुस्लिम-यादव) समीकरण वाली छवि से बाहर निकालकर 'ए टू जेड' (A to Z) वाली समावेशी पार्टी बनाना चाहते हैं। तेजस्वी का मानना है कि भविष्य की राजनीति के लिए केवल सामाजिक समीकरण ही काफी नहीं हैं, बल्कि विकास, रोजगार और शिक्षा जैसे ठोस मुद्दों पर युवाओं को जोड़ना अनिवार्य है। इसके लिए पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सीधी जवाबदेही तय करना शामिल है। तेजस्वी का विजन पार्टी को एक आधुनिक और पेशेवर राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित करना है।
लालू प्रसाद यादव भले ही स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे हों, लेकिन तेजस्वी के इस 'मिशन ट्रांसफॉर्मेशन' में उनकी छत्रछाया सबसे महत्वपूर्ण है। पार्टी के पुराने दिग्गजों और युवा चेहरों के बीच संतुलन बनाए रखना तेजस्वी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आगामी बैठकों में कई नए और शिक्षित चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे पार्टी के पुराने ढर्रे को बदलकर उसे 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढाला जा सके। तेजस्वी की इस नई टीम का मुख्य लक्ष्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर सवर्णों और दलितों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाना है।
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आरजेडी का यह नया कलेवर बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर सकता है। तेजस्वी यादव का जोर अब उग्र नारेबाजी के बजाय आंकड़ों, नीतिगत बहस और विजन आधारित राजनीति पर है। यदि वे सफलतापूर्वक पार्टी के भीतर इस संगठनात्मक बदलाव को लागू कर पाते हैं, तो यह न केवल आरजेडी के लिए बल्कि पूरे विपक्ष के भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। राजनीति के जानकार इसे लालू युग के गौरवशाली इतिहास को सहेजते हुए 'तेजस्वी युग' के आधिकारिक उदय के रूप में देख रहे हैं, जहाँ पार्टी अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी एक प्रगतिशील और समावेशी संगठन बनने की ओर अग्रसर है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.