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निराश हूं, राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया... तमिलनाडु के राज्यपाल नाराज होकर विधानसभा से गए बाहर - NDTV.in
By Aravind Sharma
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Published January 20, 2026
**निराश हूं, राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया... तमिलनाडु के राज्यपाल नाराज होकर विधानसभा से गए बाहर**
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर राजभवन और राज्य सरकार के बीच का टकराव चरम पर पहुंच गया है। 'सत्य संवाद' को प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। राज्यपाल का यह कड़ा रुख राष्ट्रगान के अपमान और संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी के आरोपों पर आधारित है। बजट सत्र के पहले दिन जब राज्यपाल अपना पारंपरिक अभिभाषण देने पहुंचे, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त संबोधन के बाद सदन छोड़ दिया। राज्यपाल का आरोप है कि उनके बार-बार सुझाव देने के बावजूद राष्ट्रगान को वह गरिमा नहीं दी गई, जिसका वह हकदार है।
राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि वह सदन में राष्ट्रगान को लेकर अपनाए गए रवैये से बेहद निराश हैं। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रगान को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए था और इसे सत्र की शुरुआत और अंत, दोनों समय बजाया जाना अनिवार्य है। राज्यपाल के अनुसार, उनके इस अनुरोध को राज्य सरकार और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लगातार अनसुना किया गया। उन्होंने इसे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया, बल्कि इसे देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय प्रतीक का अनादर भी करार दिया, जो एक संवैधानिक प्रमुख के लिए असहनीय स्थिति थी।
वहीं दूसरी ओर, विधानसभा के भीतर का माहौल उस समय और भी तनावपूर्ण हो गया जब विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने राज्यपाल के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राज्यपाल द्वारा अपना अभिभाषण पूरा न करने और बीच में ही सदन छोड़कर जाने को सत्ता पक्ष ने अनुचित बताया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल का आचरण संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं था। यह टकराव दर्शाता है कि तमिलनाडु में राजभवन और सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) सरकार के बीच वैचारिक और प्रशासनिक खाई अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सार्वजनिक मंचों पर भी कड़वाहट खुलकर सामने आ रही है।
इस पूरी घटना ने भारतीय लोकतंत्र में राज्यपाल की भूमिका और राज्य सरकारों के साथ उनके समन्वय पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि राष्ट्रगान जैसे संवेदनशील और गौरवशाली विषय पर इस तरह का सार्वजनिक विवाद न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जनता के बीच भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गलत संदेश भेजता है। फिलहाल, राज्यपाल का सदन से नाराज होकर बाहर जाना राज्य की राजनीति में एक बड़े गतिरोध का संकेत है, जिसका समाधान निकट भविष्य में संवैधानिक गरिमा को बनाए रखकर ही निकाला जा सकता है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर राजभवन और राज्य सरकार के बीच का टकराव चरम पर पहुंच गया है। 'सत्य संवाद' को प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। राज्यपाल का यह कड़ा रुख राष्ट्रगान के अपमान और संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी के आरोपों पर आधारित है। बजट सत्र के पहले दिन जब राज्यपाल अपना पारंपरिक अभिभाषण देने पहुंचे, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त संबोधन के बाद सदन छोड़ दिया। राज्यपाल का आरोप है कि उनके बार-बार सुझाव देने के बावजूद राष्ट्रगान को वह गरिमा नहीं दी गई, जिसका वह हकदार है।
राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि वह सदन में राष्ट्रगान को लेकर अपनाए गए रवैये से बेहद निराश हैं। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रगान को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए था और इसे सत्र की शुरुआत और अंत, दोनों समय बजाया जाना अनिवार्य है। राज्यपाल के अनुसार, उनके इस अनुरोध को राज्य सरकार और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लगातार अनसुना किया गया। उन्होंने इसे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया, बल्कि इसे देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय प्रतीक का अनादर भी करार दिया, जो एक संवैधानिक प्रमुख के लिए असहनीय स्थिति थी।
वहीं दूसरी ओर, विधानसभा के भीतर का माहौल उस समय और भी तनावपूर्ण हो गया जब विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने राज्यपाल के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राज्यपाल द्वारा अपना अभिभाषण पूरा न करने और बीच में ही सदन छोड़कर जाने को सत्ता पक्ष ने अनुचित बताया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल का आचरण संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं था। यह टकराव दर्शाता है कि तमिलनाडु में राजभवन और सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) सरकार के बीच वैचारिक और प्रशासनिक खाई अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सार्वजनिक मंचों पर भी कड़वाहट खुलकर सामने आ रही है।
इस पूरी घटना ने भारतीय लोकतंत्र में राज्यपाल की भूमिका और राज्य सरकारों के साथ उनके समन्वय पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि राष्ट्रगान जैसे संवेदनशील और गौरवशाली विषय पर इस तरह का सार्वजनिक विवाद न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जनता के बीच भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गलत संदेश भेजता है। फिलहाल, राज्यपाल का सदन से नाराज होकर बाहर जाना राज्य की राजनीति में एक बड़े गतिरोध का संकेत है, जिसका समाधान निकट भविष्य में संवैधानिक गरिमा को बनाए रखकर ही निकाला जा सकता है।
लेखन: सत्य संवाद न्यूज़ डेस्क | साभार: Google News
Aravind Sharma
Senior Political Correspondent with 15 years of experience.